गोपनियता का प्रदर्शन

posted under , , , by Rishabh Makrand

दॄश्य 1:

स्थानः मध्यवर्गीय मुहल्ला

पत्नी : सुनो जी, मुझे भी इस महीने मिसेज गुप्ता कि तरह का सलवार सुट ला देना. वर्ना अच्छा नहीं होगा.. बताये देती हुँ.. हाँ..

देखो ना कितना प्यारा है..

पती : कहाँ?

पत्नी : यहाँ आओ बाल्कनी मे..

पती : अरे नहीं, ये मिसेज गुप्ता का नहीं है.. उन्की ननद(सिस्टर-इन-ला) कि है, मैंने कल ही उसको ये सुट पहने देखा था.

दॄश्य 2:

स्थानः उच्चस्तरीय मुहल्ला

पुत्र : डैड, इस महीने मुझे एक्श्ट्रा पोकेट मनी चाहीये..

पिता : क्यों..

पुत्र : मुझे भी विक्की के तरह टोमि-हिलफ़िगर के अन्डरगारमेन्ट्स लेने हैं..

तभी पिन्की ने तपाक से कहा..

अरे वो तो अँकल के हैं, विक्की तो जाँकी पहनता है..


दोनो दॄश्यों का अन्त क्या हुआ होगा, आप खुद से अनुमान लगा सकते हैं..

हमारे भारत मे, किसी भी रीहायसी इलाके से गुजर जायें..या किसी पुराने बसे इलाके से..

घर की बाल्कनी देख के आप एक अन्दाज तो लगा ही सकते हो कि इस घर मे रहने वाले कौन और कैसे होंगे?

मेरा कहने का मतलब है, कि बाहर टंगे कपडों को देख कर, इतना अन्दाज तो लगाया ही जा सकता है कि घर मे कितने लोग हो सकते हैं, किस आयु वर्ग के है.. कपडों के ब्राँड, साईज, आकार, प्रकार देख कर मैं समझता हुँ इतना काफ़ी है कि एक हद तक घर मे रहने वालो के बारे मे अनुमान लगाया जा सकता है.

अरे क्यों नहीं, घर वालों ने इसी लिये तो कपडे बाहर टंगाये हुए हैं.. कि आपके सामाजिक ज्ञान का परिक्षण हो सके ..अब जैसे अगर किसी घर के बाल्कनी मे छोटे छोटे पैताबे(मोजे), छोटे छोटे तिकोने कपडे लटक रहे हो, तो क्या मुश्किल है, ये कहना कि इस घर मे एक छोटा बच्चा है.. मेरी समझ से तो नहीं..

कुछ लोग तो इसे मेल-जोल बढाने क जरिया भी बना लेते हैं,

जी, दरसल मैं दिपक मार्तंड, 301 मे रहता हुँ..आपका कपडा निचे गिरा हुआ था, आज कल हवा बहुत चलती है, तो गिर गया होगा..सोचा चल कर खुद हि दे दुँ.. हे हे हे.

गैरतलब हो कि घर मे कपडे धोने की मशीन होने के बावजुद,घर के मालकिन के अन्तर वस्त्र लहरा लहरा के जैसे आने-जाने वालों को आमंत्रित करते हों, कि आओ, एक कप चाय तो पी के जाओ..

आज के इस दौर मे, जहाँ हर कोइ अपनी गोपनियता को इतना महत्व देता है.. हमारी न्यायिक संस्था के द्वारा प्रद्दत्त, तरह तरह के नियम-कानून हैं, उल्लघन करने वाले को आर्थीक दंड या कारवास या दोनो का प्रावधान है,

क्या उन्के लिये कोइ दंड है, जो अपनी गोपनियता को खुद सार्वजनिक करने मे लगे हुए हैं??

आखिर क्या तर्क है, अपने बहुमुल्य अंतर वस्त्रो का प्रदर्शन करने के पिछे? क्या ये भी, टेलेविजन के किसी धारावाहीक कि T R P बढाने जैसा है? या कुछ और..

उत्तर मिलने तक,
आपका,
ॠषभ

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